निशब्द शब्दों को शब्दों ना दो
निशब्द शब्दों की निःशब्दता मे
मौन नहीं मुखरता होती हैं
निशब्द शब्दों को शब्दों ना दो
निशब्द शब्दों की निःशब्दता मे
मौन नहीं मुखरता होती हैं
शब्दों की दस्तक से
शब्दों के दरवाजे खुलते हैं
शब्दों के जाल मे यूही नहीं शब्द फँसते हैं
शब्दों मे सार्थकता शब्दों ने खोजी
शब्दों मे निरर्थकता शब्दों ने पाई
शब्दों की सार्थकता को शब्दों ने समझा
शब्दों की निरर्थकता को शब्दों ने झेला
शब्दों से मिलकर भी अधूरे रहते हैं शब्द
शब्द सहलाते थे शब्दो को
शब्द दुलारते शब्दो को
शब्द निहारते थे शब्दो को
समय वो और था जब
शब्द पुकारते थे शब्दो को
और शब्द सुनते थे शब्दो को
अब तो धमाके होते है
जो कान बहरे करते है
शब्दो को निशब्द करते है
अब सनाटा है
सूना है आंगन शब्दो को
बंद होगये है सब वह दरवाजे
जहाँ से आना जाना था
" आयत " ,और "सबद" ,
" श्लोक " , और"टेसटामेन्ट" का
अब शब्द देते है व्यथा शब्दो को
नहीं बाटते अब दर्द शब्द , शब्दो का
ref
आयत कुरान से , सबद गुरू ग्रंथ साहिब से , श्लोक गीता से , टेसटामेन्ट बाइबल से