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निशब्द शब्दों की निःशब्दता

निशब्द शब्दों को शब्दों ना दो

निशब्द शब्दों की निःशब्दता मे

मौन नहीं मुखरता होती हैं

शब्दों का जाल

शब्दों की दस्तक से

शब्दों के दरवाजे खुलते हैं

शब्दों के जाल मे यूही नहीं शब्द फँसते हैं

रिश्ते शब्दों के

अनजाने शब्द अजनबी
पहचाने शब्द रिश्ते
शब्दों से अजनबियों से
बनते हैं रिश्ते शब्दों के

शब्दों से मिलकर भी अधूरे रहते हैं शब्द

शब्दों मे सार्थकता शब्दों ने खोजी

शब्दों मे निरर्थकता शब्दों ने पाई

शब्दों की सार्थकता को शब्दों ने समझा

शब्दों की निरर्थकता को शब्दों ने झेला

शब्दों से मिलकर भी अधूरे रहते हैं शब्द

शब्द ही ना समझे पर शब्दो को

किस शब्द ने किस शब्द से क्या कहा
किस शब्द से किस शब्द को चोट लगी
किस शब्द से किस शब्द को दर्द हुआ
किस शब्द से किस शब्द को प्यार हुआ
किस शब्द से किस शब्द को नफरत हुई
शब्दो के जाल मे शब्दो की उम्र हुई
पर शब्द ही ना समझे पर शब्दो को

आजकल तो इंतज़ार मे हैं शब्द

मंजिल नहीं रास्ता है शब्द
हर मील का पत्थर है शब्द
ना जाने
किस रास्ते आयेगे शब्द
निशब्द नहीं है शब्द
शांत नहीं है शब्द

बस
आजकल तो इंतज़ार मे हैं शब्द

शब्द मेरे

शब्दों को दूर किया है शब्दों से मैने
ना देगे दर्द अब शब्द मेरे तुमको
निशब्द नहीं
शांत हो गए है शब्द मेरे

स्वर्णिम है वह शब्द

जिन्दगी की
कसोटी पर

घिस कर भी
जो नहीं बदले ,
आपदा मे भी
जिनका कलेवर
ना उतरे
स्वर्णिम है
वह शब्द

नहीं बाटते अब दर्द शब्द , शब्दो का

शब्द सहलाते थे शब्दो को
शब्द दुलारते शब्दो को
शब्द निहारते थे शब्दो को
समय वो और था जब
शब्द पुकारते थे शब्दो को
और शब्द सुनते थे शब्दो को
अब तो धमाके होते है
जो कान बहरे करते है
शब्दो को निशब्द करते है
अब सनाटा है
सूना है आंगन शब्दो को
बंद होगये है सब वह दरवाजे
जहाँ से आना जाना था
" आयत " ,और "सबद" ,
" श्लोक " , और"टेसटामेन्ट" का
अब शब्द देते है व्यथा शब्दो को
नहीं बाटते अब दर्द शब्द , शब्दो का
ref
आयत कुरान से , सबद गुरू ग्रंथ साहिब से , श्लोक गीता से , टेसटामेन्ट बाइबल से

निशब्द तुम्हारे शब्दो

शब्दो का खेल था
शब्दो से खेला था

निशब्द तुम्हारे शब्दो को
मन मे हमने सहेजा था

option 2


शब्दो का खेल था
शब्दो से खेला था
निशब्द तुम्हारे शब्दो को
शब्दो ने मेरे झेला था

option 3

शब्दो का खेल था
शब्दो से खेला था
निशब्द तुम्हारे शब्दो ने

शब्दो को मेरे झेला था

तुम थे तो इतराते थे शब्द

खिलखिलाते थे शब्द
मुस्कुराते थे शब्द
तुम थे तो इतराते थे शब्द

निशब्द फिर भी शब्द होते है

शब्दो को शब्द खीचते है
शब्दो से शब्द खिचते है
शब्दो मे शब्द होते है
निशब्द फिर भी शब्द होते है

शब्द कहाँ से लाऊँ वो ?

शब्द
जो गले मे अटकते है
शूल बनकर दिल को
चुभते है
शब्द
जो कलम से फिसलते है
फाँस बनकर दूसरो को
लगते है

शब्द
जो नहीं भरमाते है
सबको पसंद नहीं
आते है
शब्द
जो मन भाते है
सब को पसंद
आते है

शब्द
जो मन भाते है
वोही भरमाते है
शब्द
जो भावना की
स्याही से
लिखे जाते है
शीतलता दे जाते है

शब्द
कहाँ से लाऊँ वो
जो लाये तुमको
मिलाये हमको

इंतज़ार शब्दो का

जिन शब्दो से
आये ये शब्द
वह शब्द ही ना आये
इन शब्दो को देखने
आज भी इंतज़ार है

इन शब्दो को
उन शब्दो का

शब्द बन गये है एक सेतु

शब्द
बन गये है
एक सेतु
वह लिखती है
दर्द बहाने के लिये

वह पढ़ता है
दर्द बहाने के लिये
उसके दर्द मे
तकलीफ है

इस लिये
उसके शब्द

है कड़वे पर सच
उसकी पीड़ा
है अनकही
नहीं है शब्द
पास उसके

ना कड़वे ना सच
खड़े है दोनो
पीठ कीये
उस सेतु पर
जिसे उसके
शब्दो ने बनाया है
ओर बाँट रहे है
अनकहा