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Tuesday, April 21, 2009

शब्दों का जाल

शब्दों की दस्तक से

शब्दों के दरवाजे खुलते हैं

शब्दों के जाल मे यूही नहीं शब्द फँसते हैं

9 comments:

अनिल कान्त : said...

bahut khoob

मीनाक्षी said...

शब्दों के जाल में शब्द स्वयं ही फँसते हैं..
तभी तो सुन्दर से सुन्दरतम 'रचना' करते हैं...

महामंत्री - तस्लीम said...

शब्दों के सहारे एक अच्छा जाल बुनने की कोशिश की है आपने। बधाई।
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TSALIIM.
-SBAI-

Shamikh Faraz said...

shabdo ka achha prayog karti hain. agr aap ko asmay mile to mere blog k lie prerna se bhari koi kavita bhejen. www.salaamzindadili.blogspot.com
shamikh.faraz@gmail.com

kavi kulwant said...

nice..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

करो सतत् अभ्यास, शब्द आयेंगे बोलेंगे।
दस्तक देंगे, सभी बन्द दरवाजे खोलेंगे।।

"लोकेन्द्र" said...

क्या बात कही है आपने....
बहुत खूब...

sunil patel said...

very nice on a single word. Difficult task performed nicely.

Anonymous said...

:)